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(आभार राजस्थान पत्रिका)

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राजस्थानी भाषा री हिा
  • 12 वी शताब्दी सू साहित लिख्यो जाय रियो है।
  • 4 लाख हस्त लिखित पोथिया है और 134 रीति ग्रथ है।
  • 2 लाख 50 हजार सबदा रा 59 सबदकोश बण्या थका है।
  • आजादी पैला रियासता रौ राज-काज चालतौ।
  • छः भागा रममे ाय कहावत कोश छप्पोड़ी है।
  • राजस्थानी भाषा री व्यवस्थित अर वैज्ञानिक व्याकरण छप्पोड़ी है।
  • तीज-तैवार अर शादी-ब्याव ममे राजस्थानी भाषा रा हजारो गीत-भजन है जो गाया जावै।
  • राजस्थानी भाषा ममे गया वर्षो ममे लगभग 100 फिल्ा बणी है।
  • लगभग 10 करोड लोग दममेश-विदममेशा ममे राजस्थानी भाषा बोलममे है।
  • राजस्थानी वीरा और शुरवीरा री भाषा है।
  • या भाषा कतरी सद्ध है, इण्रो अदाज ई कहावत सु पतो लागममे कि "राजस्थान ममे हर 12 कोस (25 कि.ी.) पर भाषा व पाणी बदलममे है।"
  • कतरा ई ममेगजीन, पुस्तका व अखबार हर वर्ष राजस्थानी भाषा रा नियित निकलममे है, तथा पढ़या जावममे है।
  • राजस्थानी लोग आज विश्व रा कोना-कोना ममे व्यापार, शिक्षा, सममेना व अन्य कई क्षममेत्रा ममे बढ़-चढ नममे ना का रिया है वो वणा री कडी ममेहनत, ईानदारी, त्याग, व सममेवानिष्ठ भाव रममे कारण है इण भावा नममे वममे राजस्थानी भाषा रममे ाध्य सु राजस्थान रा इतिहास और सस्कृति सु सीखममेममे है।
  • भारत नमे स्वतत्र व्या नमे इकसठ साल हुई गया पण लगभग 10 करोड लोगा मे बोली जावा वाळी भाषा नमे सविधान सु ान्यता नी िल सकी है जदी कि अडी सु क बोलवा वाळी भाषाओ नमे ान्यता िल चुकी है।
  • सविधान सु 21 भारतीय भाषाओ नमे ान्यता िली थकी है जणा मे दमेवनागरी लिपी मे लिखी जावा वाळी 8 भाषाए है तो राजस्थानी साथमे कई सस्या है?
  • एक शोध रमे ुताबिक आज विश्व मे 6000 भाषा प्रचलित है, जी अडी सदी रमे अन्त मे घट नमे 3000 रमे जावमेला, अगर आपा आज भी नी चमेतया तो राजस्थानी भाषा रो भी ना िट जावमेला?
  • वैश्वीकरण और सस्कृतिकरण सन्तुलित विकास रमे वास्तमे जरूरी है इणरमे वास्तमे राजस्थानी, हिन्दी व अग्रमेजी भाषा नमे सान रुप उ उपयोग मे लावा री आवश्यकता है।
  • डॉ. वमेल्फील्ड (अमेरिका) रमे अनुसार "विश्व री भाषाओ मे राजस्थानी रो पच्चीसवो स्थान है।"

राजस्थानी भाषा व सस्कृति रा प्रचार वास्तमे इक्कीस सुत्रीय कार्यक्र
  1. राजस्थानी लोगा नमे आपस मे राजस्थानी मे इज बाता करणी चाइजमे।
  2. राजस्थानी फ़िल्ा, गाणा, भजना री कैसमेट व सी.डी. खरीदणी, सुणनी व साथ-साथ ित्रा व रिस्तमेदारा नमे भी सुणाणी।
  3. ब्याव-शादियाँ रा कार्ड राजस्थानी भाषा मे छपवाणा व इण अवसरा पर राजस्थानी गाणा व गीतो पर विशमेष कार्यक्रा रो आयोजन करणो व राजस्थानी गायका नमे आत्रित करणो।
  4. हज़ारा री सख्या मे राजस्थानी भाषा रा कैलमेडर, टमेबल कैलमेडर आदि छपवाणा तथा बाटणा।
  5. हर एक राजस्थानी परिवार नमे राजस्थानी भाषा री किताब, अख़बार, साहित्य, कविता, सग्रह आदि रमे वास्तमे हर हीनमे 10-1,00 रुपया ख़र्च करणा।
  6. ित्रा, रिस्तमेदारा, आडौस-पडौस आदि मे राजस्थानी भाषा री पुस्तका बाटणी।
  7. मेळा, सााजिक कार्यक्रा व धार्िक कार्यक्रा सु जुडी साग्री नमे राजस्थानी भाषा मे छपवाणो। सााजिक, राजनैतिक और धार्िक कार्यक्रो रा व्याख्यान, व भाषण राजस्थानी भाषा मे दमेणा व सुणवा रमे वास्तमे आग्रह करणो।
  8. हर एक जिला सु राजस्थानी भाषा मे चार पमेज रो साप्ताहिक या दैनिक साचार पत्र निकाळणो व बाटणो। या ाइनमे बालका व युवा वास्तमे अलग सु राजस्थानी भाषा मे ज्ञान-विज्ञान, राजनीति, खमेल, दमेश-विदमेश, साज, धर् व नोरजन री खबरा वमेवमे। (500-1000 कापियॉ सु शुरुआत की जाई सकमे।)
  9. राजस्थानी भाषा री फिल्ा रो निर्ाण करणो व पुराणी राजस्थानी फ़िल्ा रा नुवा डिजिटल सस्करण सी.डी. व डी.वी.डी. रमे रूप मे निकालणा।
  10. दमेश-विदमेश, छोटा-छोटा गाव, तथा शहरा ा राजस्थानी भाषा रा सास्कृतिक कार्यक्र, भजन, नाटक, कवि स्मेलन आदि रा नियित आयोजन करणा। इण रा आयोजना रमे वास्तमे राजस्थानी कलाकारा नमे बुलाणो।
  11. राजस्थानी भाषा रमे प्रचार-प्रसार रमे वास्तमे राजस्थान रा सभी गाँवा व शहरा मे सितियाँ बणावणी और विशमेष कोष स्थापित करणो तथा इकमे वास्तमे राजस्थानी लोगा सु भी आगमे आवा रो आग्रह करणो।
  12. राजस्थानी तीज-त्यौहार, ब्याव-शादियो मे राजस्थानी वमेश भुषा पमेहननो।
  13. विधान सभा व लोक सभा रा चुनाव रा पोस्टर, घोषणा पत्र व अन्य साग्री राजस्थानी भाषा मे छपवावा रो आग्रह सभी राजनैतिक दला सु करणो तथा नमेता लोगा सु राजस्थानी मे भाषण दमेवा को आग्रह करणो।
  14. राजस्थानी भाषा व साहित्य रमे क्षमेत्र मे उल्लमेखनीय का करवा वाळा नमे पुरस्कार व स्ान दमेणो इण्सु अन्य दुसरा लोग भी प्रोत्साहित वमेवमेला।
  15. पुराणा ज्ञान भडारा मे जो हस्तलिखित राजस्थानी भाषा रा ग्रथ पड़या है वाणै छपवावा कमे वास्तमे सब राजस्थानी उधोगपति सु एक-एक ग्रथ उणारमे जीवन काल मे छपवावा र वास्तमे निवमेदन करणो।
  16. पुरा दमेश मे जठमे-जठमे राजस्थानी लोग ज्यादा सख्या मे रमेवमे, वा जगहा रमेडियो स्टमेशन व टी.वी. चैनल पर राजस्थान (राजस्थानी) सु जुडा छोटा-छोटा कार्यक्र शुरू करणा।
  17. हर एक शहर मे राजस्थानी ॉल खोलणा जिणामे खाली राजस्थानी चीजा िलमे।
  18. राजस्थान री सभी स्कुल व कॉलमेज स्तर रमे पाठयक्र मे एक राजस्थानी भाषा व साहित्य रो सर्टीफिकमेट स्तर रो विषय चालु करवाणो।
  19. राजस्थानी भाषा मे वमेबसाईटा रो निर्ाण करणो और ज्यादा सु ज्यादा साहित्यकारा व दुसरा विशिष्ट लोगा नमे इण कार्य सु जोडणो।
  20. पुराणा किला व इारता नमे स्कुल, कॉलमेज व विश्वविधालय मे बदल दमेणो ताकि राजस्थान रा असली इतिहास सु, आगमे आवा वाली पीढिया सीधी जानकारी लमेई सकमे।
  21. विश्व राजस्थानी सघ री स्थापना करणो।
 

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