101. संग्रामसिंह सोढा नै पंडित मधुकर गौड़ सार्थक साहित्य-सम्मान
23 November 2025
"मातृभाषा रो सम्मान, अपनी संस्कृति रो सम्मान है" — श्याम महर्षि
चूरू रो नगर-श्री संस्थान में 16 नवंबर, रविवार सांझे पंडित मधुकर गौड़ सार्थक साहित्य संस्थान सम्मान–2025 रो आयोजन करियौ गयो। ई आयोजन में बज्जू (जिला बीकानेर) रा प्रसिद्ध साहित्यकार संग्रामसिंह सोढा नै राजस्थानी भाषा साहित्यकार सम्मान दियो गयो। यो सम्मान साहित्यकार पंडित मधुकर गौड़ री स्मृति में आयोजित कियो गयो। कार्यक्रम री अध्यक्षता पूर्व अकादमी अध्यक्ष अर ख्यात साहित्यकार श्याम महर्षि करीयो।
कार्यक्रम रा अध्यक्ष बोलिया—
"मधुकर गौड़ एकलौ व्यक्तित्व नी बल्के, एक संपूरण संस्थान है।
वे संपादक, लेखक, साहित्यिक आयोजक हा और गैर-हिंदी क्षेत्र में रैवता थका भी वणा लगातार हिंदी में लेखन करियो अण् बड़ा बड़ा साहित्यिक आयोजन कीधा।
महर्षि मातृभाषा रो महत्व उजागर करतां कयौ—
"मातृभाषा रो सम्मान, आपणी संस्कृति रो सम्मान है"।
वणा कह्यूं कि मधुकर गौड़ सगळा जीवन में राजस्थानी भाषा नै अपनाई राखी और मायड़ भाषा री मान्यता खातिर आखरी दम तक प्रयासरत रह्या हा।
वणा चेतावणी दी कि आज कई प्रांतीय भाषावां खतरा में है। गौड़ री स्मृति में परिवार रौ ओ आयोजन—सच्ची श्रद्धांजलि है।
मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. नामामीशंकर आचार्य बोलिया—
"प्रत्येक मनुष्य माथे तीन ऋण व्है—देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण।"
वणा कह्यो कि पंडित मधुकर गौड़ ऋषि ऋण चुकावण में पूरौ जीवन समर्पित किधो। मातृभाषा आणि मातृभूमि रे प्रति ऊणां में विशेष श्रद्धा अण् समर्पण भाव रह्यो।
वणा कह्यूं कि परिवार रौ ओ प्रयास अगली पीढ़ी खातर प्रेरणा स्रोत है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रामकुमार घोटड मधुकर गौड़ री स्मृतियों बांटता कह्यूं कि—
"वे आपणी हिंदी अर राजस्थानी पत्रिकावां में कदी स्तरहीन रचनावां प्रकाशित नी कीधी।"
वणा गौड़ रा गीतां रा कुछ अंश भी प्रस्तुत कीधा l
कार्यक्रम रो शुभारंभ सरस्वती पूजन अण् इंदिरा सिंह री सरस्वती वंदना सूं व्हीयो।
कार्यक्रम रो संचालन साहित्यकार कमल सिंह कोठारी करीयो, जिणां पंडित मधुकर गौड़, सार्थक साहित्य संस्थान और सम्मानित साहित्यकार रो परिचय प्रस्तुत किधो।
आयोजन-संयोजक राजेंद्र शर्मा ‘मुशाफ़िर’ स्वागत उद्बोधन अण् गौड़ री साहित्य यात्रा, मातृभूमि प्रेम अण् गीत-सर्जना प्रति वणारी निष्ठा रौ उल्लेख किधो ।
पंडित गौड़ री पुत्री सविता इंदोरिया आपणा पिता री साहित्य जातरा , वणारी हिंदी-राजस्थानी सेवा अर प्राप्त सम्मानां रा संस्मरण साझा किधा।
सम्मान-प्रत्युत्तर में संग्रामसिंह सोढा बोलिया—
"ओ सम्मान म्हैं मायड़ भाषा रा सगला साहित्यकारां नै समर्पित करूं।"
वणा कह्यूं कि मधुकर गौड़ रा मन में राजस्थानी भाषा रे प्रति असाधारण प्रेम रह्यो और वे “मरुधारा” पत्रिका नै जीवन रा आखरी पड़ाव तक संपादित करतां रह्या हा।
वणा कह्यूं कि गौड़ छंद और लय रा प्रबल समर्थक हा अण् सृजन नै साधना मानता हा।
इण अवसर पर विमल सारस्वत, कुमार अजय, प्रो. सुरेंद्र सोनी, ओमप्रकाश तंवर और अनसुईया शर्मा मंचस्थ अतिथियों रौ अभिनंदन कियो।
कमलेश गौड़, राजेंद्र मुशाफिर, कविता शर्मा, सविता इंदोरिया, मंजू सिंह अण् पूनम मधुकर गौड़ संग्राम सिंह सोढा नै शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न अण् ₹21,000 रो चेक भेंट कर सम्मानित कीधा।
कार्यक्रम में नगर-श्री सचिव श्याम सुंदर शर्मा, इमरान मंसूर, हरिसिंह, दीपक कामिल, रवीन्द्र शर्मा, इदरीस खत्री, गुरुदास उपाध्याय, आशीष गौत्तम, डॉ. सत्यनारायण स्वामी समेत शहर रा अनेक साहित्य-प्रेमी उपस्थित रह्या।