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आपाणो राजस्थान - समाचार

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51. प्रदेश में बणी नवीं ग्राम पंचायतां
23 November 2025
प्रदेश में 3416 नवीं ग्राम पंचायतां बणाई गई। इणमें सबसूं ज्यादा 270 पंचायतां बाड़मेर में बणी है अर सबसूं कम 19 पंचायतां झालावाड़ में बणी । राज्य सरकार राजस्थान रा 41 जिला में पंचायत पुनर्गठन अणि नई पंचायतां बणावा री अधिसूचना जारी कर दीधी है। अबे पंचायतीराज रो नक्शो बदल ग्यो। जतरी नवी पंचायतां बणी है, वणसू दोगुणीन पंचायतां रो पुनर्गठन कर्यो गयो है। लगभग हर पंचायत री सीमां में फेरबदल व्हियो है। यो फेरबदल स्थानीय राजनीति पे भी असर करेला। नई पंचायतां बणता ई अबे सरपंच, उपसरपंच अणि वार्ड पंचां रा पद भी बड़ी संख्या में बढ़ेला। अबे नया चुनाव इण नवा नक्शे सूं ही होवेला। मापदंडां में छूट कारण नई पंचायता ज्यादा बणी रेगिस्तानी जिलां में मापदंडां में छूट मिलवां सूं नई पंचायत ज्यादा बणी है। मौजूदा सरकार एक साल पहलां सूं ही पंचायतां रो पुनर्गठन रो काम चालू कर्यो हो। अब पंचायत मुख्यालय जाणो आसान होसी नई पंचायतां बणता जनता नै सुविधा होसी। बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर, चूरू समेत रेगिस्तानी जिलां अणि आदिवासी इलाकां में पंचायत रो क्षेत्र बहुत लंबो-चौड़ो हो। जनता नै पंचायत मुख्यालय जाणे खातर कई-कई किलोमीटर चालणो पड़तो हो। एक पंचायत में 3–4 गांव होण सूं दूरी भी बढ़ती थी अणि समय भी ज्यादा लागतों हो। अबे नई पंचायतां सूं क्षेत्र छोटो व्हेला अर लोगों नै सुविधा होसी। रोजगार रा नवां अवसर खुलसी नई पंचायतां बणवा सूं ग्राम सचिव, पटवारी, पंचायत सहायक जस्या पद भी बढेला। जतरी पंचायत बढ़ी, उतरा ही स्टाफ भी बढ़सी। इणसूं शिक्षित बेरोजगारां खातर रोजगार री नई संभावनाएं खुलसी। आगामी भर्ती भी इन नई पंचायतां रो ध्यान रखता पद बढ़ावेला।
52. अबे राजस्थानी में गूंजसी वंदे मातरम्; "हे मायण निवण करां म्हें... ओ जामण निवण करां म्हें
23 November 2025
वंदे मातरम्: 150 साल बाद इकराम राजस्थानी रो अनुवाद अबे राजस्थानी में गूंजसी वंदे मातरम्; "हे मायण निवण करां म्हें... ओ जामण निवण करां म्हें" जयपुर। "वंदे मातरम्" ओ देशभक्ति रो अमर गीत, जिकै आजादी री लड़ाई में करोड़ां भारतवासियां रो हुंसलो जगायो, अबे राजस्थानी में भी गूंजसी। जयपुर रा साहित्यकार इकराम राजस्थानी राष्ट्रगीत रो पहलो राजस्थानी काव्य अनुवाद तैयार करियो है। नवंबर में इण गीत 150 बरस पूरा कीधा , अणी मौके पे ओ अनुवाद मातृभूमि नै समर्पित करवा रियो है। बंकिम चंद्र चटर्जी रो लिखेलो ओ गीत सन 1882 में पहलाँ बार प्रकाशित व्हीयो। बाद में 1896 में रविन्द्रनाथ टैगोर कांग्रेस अधिवेशन में इणनै सुर में बाँधीने पहलां बार गायो। महर्षि अरविंदो इणने अंग्रेजी में अनुवाद करियो, उर्दू में मोहम्मद आरिफ खान अनुवाद करियो। अबे 150 बरस पूरा व्हिया पे इणरो राजस्थानी काव्य रूप सामै आयो है। विशेषज्ञां रो मानणो है कि ओ काम राजस्थानी भाषा नै राष्ट्रीय स्तर पर ओळख अणां सम्मान दिलावणो रो मजबूत सोपान बणियो है। इकराम राजस्थानी कहे है— "जद देश री दूजी भाषां में वंदे मातरम् रो अनुवाद हो चुक्यो, तो राजस्थानी में क्यूँ नीं? राजस्थानी में वंदे मातरम् लिखणो म्हारे वास्ते मातृभूमि नै प्रणाम करवा ज्यूँ है।" राजस्थानी काव्य अनुवाद हे मायण निवण करां म्हें, ओ जामण निवण करां म्हें। तू जलम भौम ह म्हांकी, मां सागण निवण करां म्हें। तू मीठा जळरौ झरणों, तू शीतल भाळ रो झौको। सारा जग री हरियाली, तू तरीया फूलां वाळी। सारा सुख देवण वाळी, तू वरदानां री थाली। हे मायण निवण करां म्हें, ओ जामण निवण करां म्हें।। बिरखां री शोभा न्यारी, कलिया केसर री क्यारी। मिश्री सूं मीठी बोले, कानां में अमृत घोले। सुख देणी निवण करां म्हें, ओ मायड़ निवण करां म्हें।
53. संग्रामसिंह सोढा नै पंडित मधुकर गौड़ सार्थक साहित्य-सम्मान
23 November 2025
"मातृभाषा रो सम्मान, अपनी संस्कृति रो सम्मान है" — श्याम महर्षि चूरू रो नगर-श्री संस्थान में 16 नवंबर, रविवार सांझे पंडित मधुकर गौड़ सार्थक साहित्य संस्थान सम्मान–2025 रो आयोजन करियौ गयो। ई आयोजन में बज्जू (जिला बीकानेर) रा प्रसिद्ध साहित्यकार संग्रामसिंह सोढा नै राजस्थानी भाषा साहित्यकार सम्मान दियो गयो। यो सम्मान साहित्यकार पंडित मधुकर गौड़ री स्मृति में आयोजित कियो गयो। कार्यक्रम री अध्यक्षता पूर्व अकादमी अध्यक्ष अर ख्यात साहित्यकार श्याम महर्षि करीयो। कार्यक्रम रा अध्यक्ष बोलिया— "मधुकर गौड़ एकलौ व्यक्तित्व नी बल्के, एक संपूरण संस्थान है। वे संपादक, लेखक, साहित्यिक आयोजक हा और गैर-हिंदी क्षेत्र में रैवता थका भी वणा लगातार हिंदी में लेखन करियो अण् बड़ा बड़ा साहित्यिक आयोजन कीधा। महर्षि मातृभाषा रो महत्व उजागर करतां कयौ— "मातृभाषा रो सम्मान, आपणी संस्कृति रो सम्मान है"। वणा कह्यूं कि मधुकर गौड़ सगळा जीवन में राजस्थानी भाषा नै अपनाई राखी और मायड़ भाषा री मान्यता खातिर आखरी दम तक प्रयासरत रह्या हा। वणा चेतावणी दी कि आज कई प्रांतीय भाषावां खतरा में है। गौड़ री स्मृति में परिवार रौ ओ आयोजन—सच्ची श्रद्धांजलि है। मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. नामामीशंकर आचार्य बोलिया— "प्रत्येक मनुष्य माथे तीन ऋण व्है—देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण।" वणा कह्यो कि पंडित मधुकर गौड़ ऋषि ऋण चुकावण में पूरौ जीवन समर्पित किधो। मातृभाषा आणि मातृभूमि रे प्रति ऊणां में विशेष श्रद्धा अण् समर्पण भाव रह्यो। वणा कह्यूं कि परिवार रौ ओ प्रयास अगली पीढ़ी खातर प्रेरणा स्रोत है। विशिष्ट अतिथि डॉ. रामकुमार घोटड मधुकर गौड़ री स्मृतियों बांटता कह्यूं कि— "वे आपणी हिंदी अर राजस्थानी पत्रिकावां में कदी स्तरहीन रचनावां प्रकाशित नी कीधी।" वणा गौड़ रा गीतां रा कुछ अंश भी प्रस्तुत कीधा l कार्यक्रम रो शुभारंभ सरस्वती पूजन अण् इंदिरा सिंह री सरस्वती वंदना सूं व्हीयो। कार्यक्रम रो संचालन साहित्यकार कमल सिंह कोठारी करीयो, जिणां पंडित मधुकर गौड़, सार्थक साहित्य संस्थान और सम्मानित साहित्यकार रो परिचय प्रस्तुत किधो। आयोजन-संयोजक राजेंद्र शर्मा ‘मुशाफ़िर’ स्वागत उद्बोधन अण् गौड़ री साहित्य यात्रा, मातृभूमि प्रेम अण् गीत-सर्जना प्रति वणारी निष्ठा रौ उल्लेख किधो । पंडित गौड़ री पुत्री सविता इंदोरिया आपणा पिता री साहित्य जातरा , वणारी हिंदी-राजस्थानी सेवा अर प्राप्त सम्मानां रा संस्मरण साझा किधा। सम्मान-प्रत्युत्तर में संग्रामसिंह सोढा बोलिया— "ओ सम्मान म्हैं मायड़ भाषा रा सगला साहित्यकारां नै समर्पित करूं।" वणा कह्यूं कि मधुकर गौड़ रा मन में राजस्थानी भाषा रे प्रति असाधारण प्रेम रह्यो और वे “मरुधारा” पत्रिका नै जीवन रा आखरी पड़ाव तक संपादित करतां रह्या हा। वणा कह्यूं कि गौड़ छंद और लय रा प्रबल समर्थक हा अण् सृजन नै साधना मानता हा। इण अवसर पर विमल सारस्वत, कुमार अजय, प्रो. सुरेंद्र सोनी, ओमप्रकाश तंवर और अनसुईया शर्मा मंचस्थ अतिथियों रौ अभिनंदन कियो। कमलेश गौड़, राजेंद्र मुशाफिर, कविता शर्मा, सविता इंदोरिया, मंजू सिंह अण् पूनम मधुकर गौड़ संग्राम सिंह सोढा नै शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिह्न अण् ₹21,000 रो चेक भेंट कर सम्मानित कीधा। कार्यक्रम में नगर-श्री सचिव श्याम सुंदर शर्मा, इमरान मंसूर, हरिसिंह, दीपक कामिल, रवीन्द्र शर्मा, इदरीस खत्री, गुरुदास उपाध्याय, आशीष गौत्तम, डॉ. सत्यनारायण स्वामी समेत शहर रा अनेक साहित्य-प्रेमी उपस्थित रह्या।