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आपाणो राजस्थान - समाचार

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91. किसानां नै सरकार को तोहफ़ो: केंद्र सरकार आपणा किसानां सारू दाळ-दहळन री खरीद अर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बाबत एक खास ऐलान करियो है।
06 December 2025
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ईं बात रो ऐलान करियो है कै सरकार रजिस्टर हुया किसानां सूं तुअर (अरहर), उड़द अर मसूर री सौ टका (100%) खरीद एमएसपी (MSP) माथै पक्की करेला। जो राजस्थान राज्य सरकारां दाळां री खरीद कम करे या नीं करे, तो भी केंद्र सरकार नैफेड (NAFED) अर एनसीसीएफ (NCCF) जकी आपणी एजेंसियां रै ज़रिये सीधे किसानां सूं खरीद करेला। ईं कदम रो खास मकसद यो है कै किसानां नै उणां री ऊपज रो पूरो फ़ायदो मिळै अर बाज़ार रा भावां में अनाप-शनाप उतार-चढ़ाव सूं छूटकारो मिळै। यो फ़ैसला दाळ रै उत्पादन में देस नै आतम-निरभर बणावण री दिसा में एक मोटो पग है। कृषि मंत्री दोहरायो कै केंद्र सरकार स्वामीनाथन आयोग री सिफ़ारिसां नै पूरो मान’र, किसानां री लागत माथै 50 फीसदी मुनाफ़ो दे’र एमएसपी तय करण रो फ़ैसला 2019 में लियो हो अर वाँ रो पालन हो रियो है। सरकार हाल ही में विपणन मौसम 2026-27 सारू घणी रबी फ़सळां री एमएसपी में ऐतिहासिक बढ़त करी है, जिणसूं किसानां नै उणां री ऊपज रा चोखा दाम मिळ सकै।
92. माणक अलंकरण - 2025 खातर प्रविष्टियाँ आमंतरीत
06 December 2025
जोधपुर। 'माणक अलंकरण 2025' अर दूजा पाँच विशिष्ट पुरस्कारां खातर, खोजपूर्ण, तथ्यात्मक, रचनात्मक समाचारां अर खास रिपोर्टिंग रै मार्फ़त ऊँच-दरजै री पत्रकारिता करता थका राजस्थान री सेवा करण वाळा पत्रकारां, जनसंपर्क कर्मियां, छायाकारां/कार्टूनिस्टां, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सूं जुड़्यी प्रतिभावाँ री प्रविष्टियाँ बुलाई गी है। ईं रै अलावा, एक विशिष्ट पुरस्कार (राजस्थानी लेखन री महिला साहित्यकार) खातर भी प्रविष्टियाँ आमंतरीत करी गी है। प्रविष्टियाँ 9 दिसम्पर 2025 तक 'माणक अलंकरण चयन समिति, माणक दैनिक जलतेदीप, मानजी को हत्था, पावटा, जोधपुर-342006' माथे पूगणी जरूरी है। 'माणक अलंकरण 2025' सूं सम्मानित करीजण वाळा पत्रकार अर विशिष्ट पुरस्कारां सारू चुणीयिड़ी प्रतिभावाँ रा नाँव री घोषणा स्व. माणक मेहता री 50वीं पूण्यतिथि 12 दिसम्पर 2025 नै एक 'आत्मीय गोष्ठी' में चयन समिति रै निर्णय मुजब करी जावैला। माणक अलंकरण 2025 अर विशिष्ट पुरस्कारां खातर दिसम्पर 2024 सूं नवम्बर 2025 तक री अवधी में छप्या समाचार, रिपोर्टाज, छायाचित्र/कार्टून, राजस्थानी लेखन (महिला) आदि रो जिकर कटिंग/छाया प्रतियाँ अर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कवरेज री सीडी रै साथै भेजणो जरूरी है। राजस्थान रा पत्रकारां नै खोजपूर्ण अर ऊँची पत्रकारिता खातर हिम्मत देण रै मकसद सूं दैनिक जलतेदीप रा संस्थापक स्व. माणक मेहता री याद में 'माणक अलंकरण' सूं हर साल एक होशियार पत्रकार नै सम्मानित करीजै है। ईं रै अलावा जनसंपर्क कर्मियां, कार्टूनिस्ट/छायाकार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अर राजस्थानी लेखन (महिला साहित्यकार) सूं जुड़्यी प्रतिभावाँ खातर विशिष्ट पुरस्कार चुण'र उणां नै सम्मानित करीजै है। ईं पुरस्कार रै तहत चुणीयिड़ा पत्रकार नै रु.21,000/- (इक्कीस हजार) री पुरस्कार राशी, श्रीफल, शॉल अर प्रशस्ति-पत्र दे'र सम्मानित करीजै, जणांकै हर विशिष्ट पुरस्कार रै तहत रु.7,100/- (सात हजार सौ) री पुरस्कार राशी, श्रीफल, शॉल अर प्रशस्ति-पत्र दियो जावै है। बतावणी जोग है कै साल 1981 में स्थापी 'माणक अलंकरण' सूं अब तांई प्रदेश रा 43 पत्रकार सम्मानित हो चुक्या है। ईं सम्मान नै दैनिक जलतेदीप रै स्थापना दिवस 2 अक्टूबर (अथवा बदळ्यी तारीख) माथे दियो जावै है।
93. सांसद मायड़ भाषा सारू फरज निभाओ: साहित्यकार लछमण दान कविया प्रदेश रा पच्चीसां सांन्सिदां ने लिख्यो ग्यापन
06 December 2025
मूंडवा - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति रा संथापक लछमण दान कविया प्रदेश रा पच्चीसां सांन्सिदां ने मायड़ भाषा राजस्थानी सारू फरज निभावण रो आगरो करयो है। कविया प्रदेश रा पच्चीसां सांन्सिदां ने लिख्या ग्यापनां में लिख्यो है कै राजस्थानी भाषा विस्व री पच्चीसवीं अर देस री तीसरी सबसूं मोटी साहित्यिक भासा है। आजादी सूं पैली राजपूताणा री रियासतां में काम-काज री भासा ईं राजस्थानी रैयी है। आजादी रै पछै ईं राजस्थानी री कानूनी मान्यता री मांग गांधीजी री विचारधारा रै साथै चालती आई है। ईं प्रदेश में ईं बात रो दुख है कै अठै री जनता अर राजनेतिक नेता दोनूं ईं मायड़ भासा सारू उदास हैं, जिकै सूं राजस्थानी री पैचाण दिनानुदिन कम होवती जा री है। भासावां री मान्यता रा मापदंड अठै ठीक कोनी, जिकै कारण राजस्थानी भासा ने हर क्षेत्र में पिछड़ी भासावां री राजनीतिक कारणां सूं संबैधानिक मान्यता दे दी गी है। राजस्थान प्रदेश री जनता मन सूं बडी है अर हिन्दी ने राष्ट्रभासा बणावण रै मारग में ओळी निभाण सारू आपणी मायड़ भासा रो बडौ बलिदान दियो। आजादी रै तुरंत पछै प्रदेशवासी नेतावां हिन्दी भासा ने प्रदेश री राजभासा बणावण में लाग्या रैया। अब टैम आ गयो है कै प्रदेश रा पच्चीस ईं सांन्सिद मायड़ भाषा सारू आपणी ओळी निभावतां संसद रै सीतकालीन सत्र में राजस्थानी भाषा ने संबैधानिक मान्यता दिलवावण री पुरजोर मांग उठावण रो श्रेय अर प्रेय काम कराओ।
94. पांचवें पोकरमल राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कार सारू परविश्टियां मांग़ी
06 December 2025
पांचवें पोकरमल राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कार सारू परविश्टियां मांग़ी बीकानेर/ 'मुक्ति संस्था', बीकानेर गत पांच साल सूं हर साल 'राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कारां' री श्रंखला सुरू करी ही। 'मुक्ति संस्था' रा सचिव, कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी बतायो कै राजस्थानी भासा में राष्ट्रीय स्तर माथै 'पोकरमल राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कार'* हर साल राजस्थानी कथाकारां ने भेंट करया जावै है। जोशी बतायो कै ईं साल ईं दो राजस्थानी कथाकारां ने पुरस्कार दीया जावैला। पहलो पुरस्कार 'राजस्थानी कथा साहित्य सृजन'* अर दूजो 'राजस्थानी महिला कथा सृजन पुरस्कार' जो खाली महिलावां ने ईं दीयो जावैला। जोशी बतायो कै जणी दो साहित्यकारां रो चुनाव होवैला, उणां ने पुरस्कार रै मूजब ग्यारै-ग्यारै हजार रूप्या, शॉल, श्रीफल, यादगारी चीन्ह अर अभिनन्दन-पत्र भेंट करीया जावैला। वणां बतायो कै पुरस्कार बांटण रो काम पोकरमल राजरानी गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट रै सौजन्य सूं होवैला। पोकरमल राजरानी गोयल ट्रस्ट रा अध्यक्ष डॉ. नरेश गोयल बतायो कै साल 2022 सूं 2024 रै बीच छप्योड़ी राजस्थानी कहाणी-संग्रह या उपन्यास री एक पोथी 31 जनवरी 2026 तांईं - 'राजेन्द्र जोशी, तपसी भवन नत्थूसर बास, ब्रह्म बगीचे रै पाछै, बीकानेर 334004'* रै पतै माथै खुद जायर'र या डाक सूं भेजी जा सकै है। पुरस्कार चुनण सारू बणायोड़ी कमेटी रो फैसलो आखिरी अर माननै जोग होवैला।
95. राजस्थान सूं जुड़ी चोखी खबरां
06 December 2025
1- असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा सूं रोक हटी: राजस्थान हाईकोर्ट असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2025 माथै लागी रोक हटा दी है, अर RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग) अब 7 सूं 20 दिसंबर तांई होवण वाळा ईं इम्तहांन सारू एडमिट कार्ड जारी कर दीया है। ईं सूं तैय्यारी करैण वाळा उमीदवारां ने बड्डी राहत मिली है। 2- किसान ने बड्डो तौफो – हांटा (गन्नै) रो दाम बढ्यो: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा किसानां ने तौफो देवतो थका गन्ना रो समर्थन मूल्य (SAP) बढ़ावण रो ऐलान कियो है। 3 - अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप सूं राजस्थान री बेटी रो मान: राजस्थान री एक बेटी योगिता ने एक साथै दो अंतरराष्ट्रीय स्कॉलरशिप मिली है, जिण सूं प्रदेश रो नाम ऊंचो हुयो है। 4- गंग नहर रै 100 बरस पूरा होवण माथै सोगात: गंग नहर रै 100 बरस पूरा होवण माथै मुख्यमंत्री नहरी तंत्र सारू रु. 1717 करोड़ रा कामां री सोंगात दी है। 5- अलवर सहर में AI कैमरा लागैला: अलवर पुलिस सहर में बढ़ रह्या अपराध ने रोकण सारू 9 जग्यां माथै आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक वाळा कैमरा लगावैला। ईं सूं बदमाश री पैचाण होवैला अर चोरी या संदिग्घ गाड़्यां री जांणकारी तुरंत पुलिस ने मिल जावैला
96. योगाचार्य प्रीतम सिंह चुंडावत द्वारा लिखित पुस्तक शिवोहम योग साधना" रो विमोचन
23 November 2025
शिवोहम योग केंद्र रा संचालक योगाचार्य प्रीतम सिंह चुंडावत जी लिखी किताब "शिवोहम योग साधना" रो विमोचन सिटी पैलेस शंभू निवास में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सा कर कमलां सूं घणा ही सम्मान री साथे करायो गयो। डॉ. लक्ष्यराज सिंह जी कह्यो कि आ किताब योग क्षेत्र में एक खासी काम री चीज़ है, खासकर नवा-नवा योग साधकां खातर तो बिलकुल नेमत बराबर है। ऊँणा कह्यो कि छोटी-सी किताब में योग रा लगाबगा सगळा महत्त्वपूर्ण ज्ञान ने आकर्षक चित्रां सूं, अने सरल-सी भाषा में समेट्यो है। किताब असी है कि एक वारी पढ़ो तो फेर कोई और ग्रंथ ने देखण री जरूरत नी पड़ै। डॉ. साहब कह्यो कि आ किताब “गागर में सागर” वाळी उक्ति ने अखेर साँचो कर देवे है। असी किताब तो हर योग प्रेमी पास होणीच चावे, क्योंकि अणी में योग रो सगलों सार समायलो पड्यो है।
97. बालकथा कृति बातां री मुळक माथे प्रश्नोतरी कार्यक्रम। विजेतावां ने कीधा पुरस्कृत।
23 November 2025
श्रीडूंगरगढ़/बीकानेर। राजस्थानी जन-जागरण रे लिए ‘उजास समारोह’ आयोजित सांस्कृतिक धरोहर भाषा रो सम्वर्द्धन आपणी सामाजिक जिम्मेवारी- सरोज पूनिया_ मरुभूमि शोध संस्थान श्रीडूंगरगढ़ द्वारा राजस्थानी जन जागरण अभियान रे अन्तर्गत राजस्थली रे बैनर तळे उजास समारोह आयोजित करियो गयो, जिणमें विमला नागला री राजस्थानी बाल कथा कृति बातां री मुळक माथे प्रश्नोतरी प्रतियोगिता संस्कृति भवन में आयोजित करीगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों रे साथे सम्पन्न समारोह में मुख्य अतिथि रे रूप में उद्बोधन करता मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सरोज पूनिया वीर कह्यो कि राजस्थानी आपाणी सांस्कृतिक धरोहर है और इणरो संरक्षण, अनुरक्षण और सम्वर्द्धन एक महत्ती सामाजिक जिम्मेवारी है। वीर कह्यो कि जद-जद भी कोई समाज आपणी भाषा सूं विमुख व्हीयो है, तद-तद सामाजिक और समग्र बौद्धिक विकास रो मारग बाधित व्हियो है। अणी सूं पेहला समारोह रे संयोजक साहित्यकार रवि पुरोहित राजस्थानी ने दूजी राजभाषा एवं संविधान री आठवीं अनुसूची में शामिल किया जावा री मांग उठावता थका नवी शिक्षा नीति रा प्रावधाना रे अनुरूप प्राथमिक शिक्षा रो माध्यम राजस्थानी किया जावा ने समय री जरूरत बतायो। ख्यात साहित्यकार व राजस्थली रा सम्पादक श्याम महर्षि राजस्थानी ने राजस्थान री अस्मिता बतावता थका आह्वान किधो कि अबे समय आय ग्यो है कि आपा आपणी इण समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने उणरो वाजिब हक दिलावा, नितर आवा वाळी पीढ़ियां आपने माफ नी करेला। समारोह अध्यक्ष साहित्यकार छगनलाल सेवदा भाषायी विकास रे लिए असी प्रतियोगितावां ने सर्वथा अलहदा नवाचार बतावता कह्यो कि रुंखड़ा ने सींचवा री ठौड़ जड़ा ने मजबूत करणी पड़ेला ताकि नई पीढ़ी अणीरी समृद्धता सूं परिचित व्है सके। समारोह रे प्रारम्भ में सहयोगी संस्था बागेश्वरी साहित्य, कला, सांस्कृतिक विरासत संस्थान रे अध्यक्ष श्री शकूर बिकाणवी सगळा रो स्वागत कीधो। समारोह रो संचालन कवयित्री भगवती पारीक मनु कीधो । प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार विजेताओं ने क्रमषः 1100, 700 व 500 रु. नगद पारितोषिक अर सान्त्वना पुरस्कार विजेतावा ने नगद पारितोषिक रे साथे उपरणा, ट्राफी, मेडल व पुस्तका रा सैट अर्पित कीधा। अणा टाबरां ने मिल्यो पुरस्कार सरस्वती सिद्ध पुत्री परमेश्वरनाथ, लिखमादेसर (प्रथम), आईना शर्मा पुत्री तोलाराम, सातलेरां (द्वितीय), प्रिया पारीक पुत्री अशोक कुमार, लिखमादेसर (तृतीय)। भावना पुत्री आईदान पारीक, लिखमादेसर, गजानंद पुत्र हीराराम, कल्याणसर पुराना, बल्ली पुत्री कोजाराम, तनु मेघवाल पुत्री पेमाराम, बिग्गा, नितेश जोशी पुत्र महेश जोशी, श्रीडूंगरगढ़ (सान्त्वना पुरस्कार)।
98. केंद्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली राजस्थानी भाषा नो सर्वोच्च बाल साहित्य पुरस्कार वागड़ अंचल रा बाल साहित्यकार भोगीलाल पाटीदार ने आप्यो
23 November 2025
सीमलवाड़ा। साहित्य अकादमी रो प्रतिष्ठित बाल साहित्य पुरस्कार राजस्थानी भाषा खातिर वागड़ अंचल ना वरिष्ठ साहित्यकार भोगीलाल पाटीदार (चुंडावाड़ा, सीमलवाड़ा) ने मलियो। आ पुरस्कार आना बाल नाटक संग्रह "पंखेरुव नी पीड़" खातिर प्रदान थायो। आ पुरस्कार नई दिल्ली ना तानसेन मार्ग स्थित त्रिवेणी कला संगम सभागार मा बाल दिवस ना अवसर पर आयोजित समारोह मा आपायो। कार्यक्रम मा साहित्य अकादमी ना अध्यक्ष, प्रख्यात कवि अने आलोचक डॉ. माधव कौशिक पाटीदार ने पचास हजार रूपिया, ताम्रपत्र अने शॉल आपीन सम्मानित करिया। कार्यक्रम मा गुजरात नी सुप्रसिद्ध लेखिका वर्षा दास मुख्य अतिथि हती। अकादमी नी उपाध्यक्ष डॉ. कुमुद शर्मा अपनुं वक्तव्य प्रस्तुत कर्यू। राष्ट्रीय सचिव पल्लवी प्रशांत होलकर स्वागत उद्बोधन आप्यो अने संचालन हिंदी नी ख्यात कवयित्री अनामिका कर्यू। आ अवसर पर देश नी 24 भारतीय भाषावां मा बाल साहित्य पुरस्कार प्रदान करवा मा आव्या। भोगीलाल पाटीदार नी कृति "पंखेरुव नी पीड़" मा बदलता पर्यावरण, जंगल माथी विलुप्त थता पक्षियों अने ओनी पीड़ा ने बालसुलभ भाषा मा बहुत मार्मिक रीते प्रस्तुत करवा मा आवी छे। पुरस्कार ग्रहण करतां समय, पाटीदार जी वागड़ नी परंपरागत वेशभूषा फालिया, कुर्ता अने धोती मा उपस्थित रह्या। समारोह मा साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखक दिनेश पंचाल अने मार्तंड पाटीदार पन उपस्थित रह्या।
99. प्रदेश में बणी नवीं ग्राम पंचायतां
23 November 2025
प्रदेश में 3416 नवीं ग्राम पंचायतां बणाई गई। इणमें सबसूं ज्यादा 270 पंचायतां बाड़मेर में बणी है अर सबसूं कम 19 पंचायतां झालावाड़ में बणी । राज्य सरकार राजस्थान रा 41 जिला में पंचायत पुनर्गठन अणि नई पंचायतां बणावा री अधिसूचना जारी कर दीधी है। अबे पंचायतीराज रो नक्शो बदल ग्यो। जतरी नवी पंचायतां बणी है, वणसू दोगुणीन पंचायतां रो पुनर्गठन कर्यो गयो है। लगभग हर पंचायत री सीमां में फेरबदल व्हियो है। यो फेरबदल स्थानीय राजनीति पे भी असर करेला। नई पंचायतां बणता ई अबे सरपंच, उपसरपंच अणि वार्ड पंचां रा पद भी बड़ी संख्या में बढ़ेला। अबे नया चुनाव इण नवा नक्शे सूं ही होवेला। मापदंडां में छूट कारण नई पंचायता ज्यादा बणी रेगिस्तानी जिलां में मापदंडां में छूट मिलवां सूं नई पंचायत ज्यादा बणी है। मौजूदा सरकार एक साल पहलां सूं ही पंचायतां रो पुनर्गठन रो काम चालू कर्यो हो। अब पंचायत मुख्यालय जाणो आसान होसी नई पंचायतां बणता जनता नै सुविधा होसी। बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर, चूरू समेत रेगिस्तानी जिलां अणि आदिवासी इलाकां में पंचायत रो क्षेत्र बहुत लंबो-चौड़ो हो। जनता नै पंचायत मुख्यालय जाणे खातर कई-कई किलोमीटर चालणो पड़तो हो। एक पंचायत में 3–4 गांव होण सूं दूरी भी बढ़ती थी अणि समय भी ज्यादा लागतों हो। अबे नई पंचायतां सूं क्षेत्र छोटो व्हेला अर लोगों नै सुविधा होसी। रोजगार रा नवां अवसर खुलसी नई पंचायतां बणवा सूं ग्राम सचिव, पटवारी, पंचायत सहायक जस्या पद भी बढेला। जतरी पंचायत बढ़ी, उतरा ही स्टाफ भी बढ़सी। इणसूं शिक्षित बेरोजगारां खातर रोजगार री नई संभावनाएं खुलसी। आगामी भर्ती भी इन नई पंचायतां रो ध्यान रखता पद बढ़ावेला।
100. अबे राजस्थानी में गूंजसी वंदे मातरम्; "हे मायण निवण करां म्हें... ओ जामण निवण करां म्हें
23 November 2025
वंदे मातरम्: 150 साल बाद इकराम राजस्थानी रो अनुवाद अबे राजस्थानी में गूंजसी वंदे मातरम्; "हे मायण निवण करां म्हें... ओ जामण निवण करां म्हें" जयपुर। "वंदे मातरम्" ओ देशभक्ति रो अमर गीत, जिकै आजादी री लड़ाई में करोड़ां भारतवासियां रो हुंसलो जगायो, अबे राजस्थानी में भी गूंजसी। जयपुर रा साहित्यकार इकराम राजस्थानी राष्ट्रगीत रो पहलो राजस्थानी काव्य अनुवाद तैयार करियो है। नवंबर में इण गीत 150 बरस पूरा कीधा , अणी मौके पे ओ अनुवाद मातृभूमि नै समर्पित करवा रियो है। बंकिम चंद्र चटर्जी रो लिखेलो ओ गीत सन 1882 में पहलाँ बार प्रकाशित व्हीयो। बाद में 1896 में रविन्द्रनाथ टैगोर कांग्रेस अधिवेशन में इणनै सुर में बाँधीने पहलां बार गायो। महर्षि अरविंदो इणने अंग्रेजी में अनुवाद करियो, उर्दू में मोहम्मद आरिफ खान अनुवाद करियो। अबे 150 बरस पूरा व्हिया पे इणरो राजस्थानी काव्य रूप सामै आयो है। विशेषज्ञां रो मानणो है कि ओ काम राजस्थानी भाषा नै राष्ट्रीय स्तर पर ओळख अणां सम्मान दिलावणो रो मजबूत सोपान बणियो है। इकराम राजस्थानी कहे है— "जद देश री दूजी भाषां में वंदे मातरम् रो अनुवाद हो चुक्यो, तो राजस्थानी में क्यूँ नीं? राजस्थानी में वंदे मातरम् लिखणो म्हारे वास्ते मातृभूमि नै प्रणाम करवा ज्यूँ है।" राजस्थानी काव्य अनुवाद हे मायण निवण करां म्हें, ओ जामण निवण करां म्हें। तू जलम भौम ह म्हांकी, मां सागण निवण करां म्हें। तू मीठा जळरौ झरणों, तू शीतल भाळ रो झौको। सारा जग री हरियाली, तू तरीया फूलां वाळी। सारा सुख देवण वाळी, तू वरदानां री थाली। हे मायण निवण करां म्हें, ओ जामण निवण करां म्हें।। बिरखां री शोभा न्यारी, कलिया केसर री क्यारी। मिश्री सूं मीठी बोले, कानां में अमृत घोले। सुख देणी निवण करां म्हें, ओ मायड़ निवण करां म्हें।